शब-ए-मेराज | Shab e Meraj Festival | shab e meraj क्या है? पूरी जानकारी जाने

shab e meraj क्या है?  पूरी जानकारी जाने हम से

आपने और हमने लगातार कई सारे ऐसे संस्कृतियों के बारे में पढ़ा और जाना है जिनके माध्यम से हम एकजुट होकर आगे बढ़ सकते हैं और एक दूसरे के प्रति इज्जत की भावना को बढ़ा भी सकते हैं|  जब भी हम किसी दूसरे संस्कृति के बारे में समझते या जानते हैं, तो अपने आप ही मन में आदर का भाव आ जाता है जिसके बाद हम  अलग-अलग संस्कृतियों और धर्मों के बारे में जानना जरूरी समझते हैं ताकि आने वाली पीढ़ी को भी इसके बारे में सही जानकारी प्राप्त हो सके| आज हम आप को  शब- ए-  मेराज ( shab e meraj के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं जिसके बारे में कई लोगों को ज्ञान नहीं होगा  लेकिन फिर भी इसे जानना जरूरी है|

Shab e Meraj

क्यों खास है शब — ए–  मेराज ( shab e meraj

इस्लाम धर्म में शब-  ए-  मेराज ( shab e meraj का बहुत ही खास महत्व है क्योंकि इस दिन कुछ ऐसा खास हुआ था जिसके वजह से आज तक इस्लाम धर्म में इस दिन को खास महत्व दिया गया है|  दरअसल अगर हम इस्लामिक कैलेंडर की बात करते हैं, तो रजब के महीने की 27 तारीख को यह मनाया जाता है और यह एक प्रकार से  ग्रेगोरियन कैलेंडर के ऊपर आधारित होता है और  इस तारीख को शब–  ए — मेराज की ( shab e meraj रात कहा जाता है|  Also Read

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क्या है मान्यता ? ( shab e meraj

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि इसका इस्लामिक  धर्म  में  इसका बहुत ज्यादा महत्व माना गया है क्योंकि ऐसा माना गया है कि इस तारीख को पैगंबर मोहम्मद हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलेह वसल्लम और अल्लाह की मुलाकात हुई थी और इसीलिए इस रात को पवित्र रात के रूप में माना जाता है और हर इस्लाम के दिल ने इस मान्यता को लेकर  किसी  प्रकार का  असमंजस नहीं देखा गया है क्योंकि यह सर्वमान्य है कि इस दिन  ऐसी घटना हुई थी|  इसके अलावा यह भी माना जाता है कि हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैह,  वसल्लम ने मिलकर मक्का से येरूशलम तक का सफर तय किया था, और ऐसा भी माना गया है कि  बैत – अल – मुकद्दस   मस्जिद से  सफर  करते हुए  अल्लाह से मुलाकात हुई थी|

इस्लाम में शब ए मेराज ( shab e meraj का है बहुत ही खास महत्व

इस्लाम धर्म में प्राचीन समय से ही शब–  ए– मेराज ( shab e meraj का बहुत ही खास महत्व माना गया है| ऐसा माना जाता है कि जो भी इस दिन  रोजा रखते हैं  एवं  रात को कुरान पढ़ते हैं, उन्हें अल्लाह की तरफ से बहुत बड़ा सवाब मिलता है|  ऐसा भी माना जाता है जो रात भर कुरान  पढ़ता  है, उसे कई रातों की इबादत करने के बराबर सवाब मिलता है जिसे हमेशा ही खास महत्व प्राप्त है| 

कैसे मनाया जाता है शब ए मेराज ( shab e meraj का खास दिन

Shab e Meraj

शब — ए–  मेराज ( shab e meraj का दिन  पूरे विश्व में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है और इस दिन को पूरे साल में पवित्र दिनों में से एक माना जाता है| इस दिन रात के समय में विशेष रूप से प्रार्थना की जाती है और कई लोग इस दिन उपवास रहकर भी  अल्लाह की  इबादत करते हैं| साथ ही साथ सभी छोटे-बड़े मस्जिदों को बहुत ही अच्छी तरीके से सजाया जाता है और लोग सुबह से ही नहा कर अपने अल्लाह की इबादत में लग जाते हैं|  जैसे ही रात होती है,  तो लोग मस्जिदों में इकट्ठा हो कर नमाज पढ़ते हैं और पैगंबर मोहम्मद साहब को याद करते हैं| 

 ऐसा भी देखा गया है कि कई जगहों पर जुलूस और मेले का आयोजन किया जाता है जहां पर लोग ज्यादा से ज्यादा जमा होकर एक  दूसरे से मिलते हैं| ऐसा माना जाता है कि अगर इस महीने की 26 और 27 तारीख को रोजा रखा जाता है तो विशेष प्रकार का फल प्राप्त होता है| जो आने वाली पीढ़ी के बेहतर भविष्य के लिए बहुत ही कारगर होता है|

शब ए मेराज ( shab e meraj की खास घटनाा

Shab e Meraj

इस्लाम धर्म में इसे खास घटनाओं में माना गया है और ऐसा कहा जाता है कि मान्यताओं के अनुसार अल्लाह के पैगंबर मोहम्मद साहब एक दिन अपने घर में सोए होते हैं तभी उनके पास एक सज्जन आता है तो खुद को खुदा का सबसे अच्छा फरिश्ता बताता है और उनका नाम हजरत जिब्रील था| वे मोहम्मद साहब को काबा के पास हतीम में लेकर चले जाते हैं| उसके बाद ऐसा माना जाता है कि ले जाने के बाद उनका सीना चीर कर उनके सोने का दिल निकाल लिया जाता है और जिसे अच्छी तरह से धो लिया जाता है इसके बाद हजरत जिब्रील ने पैगंबर मोहम्मद साहब का दिल पहले की तरह उनके सीने में वापस कर दिया और इसके बाद शुरू होती है इस रथ यात्रा जो कि उनके पास एक जानवर  के माध्यम से पूरी हुई|

 यह जानवर  थोड़ा विचित्र था जो कि घोड़े से थोड़ा छोटा और गधे से थोड़ा बड़ा था,जिसका रंग  बिल्कुल  सफेद था और  जिसका नाम  बुराक रखा गया|  यह भी माना जाता है कि  यह अजीब जानवर  बुराक को पैगंबर मोहम्मद साहब के सामने लाया गया, तो उस पर जैन कसी हुई थी  और  जब उस पर  नकील की गई तो वह आनाकानी करने लगा|

 लेकिन जैसे ही इस बात का पता चला कि पैगंबर मोहम्मद साहब खुदा के बंदे हैं तो फिर  उसे  घबराहट होने लगी और उस पर सवार होकर मोहम्मद साहब बैतूल मुकद्दस में पहुंचे जहां उस को बांधकर मस्जिद के अंदर नमाज पढ़ने चले गए| नमाज पढ़ने के बाद  हजरत जिब्रील ने पैगंबर मोहम्मद का हाथ पकड़कर आसमानों की यात्रा कराते हुए स्वर्ग लोक में अल्लाह के पास लेकर गए और इस दौरान उनकी अल्लाह के  सात दिव्य पुरुषों के माध्यम से मुलाकात हो गई जहां हर आसमान पर उन्हें अलग-अलग खुदा के बंदों से मुलाकात करवाया गया|

जब पैगंबर मोहम्मद साहब ने अल्लाह के सभी   बंदों से मिलते हुए आगे बढ़े उसके बाद ही उनकी मुलाकात अल्लाह ताला से हुई और उनके जीवन में नए परिवर्तन आ गए| 

क्या है शब ए मेराज ( shab e meraj की आधुनिक परंपरा 

अगर प्राचीन समय  से तुलना की जाए तो आज के समय में काफी परिवर्तन देखा जा रहा है | इसी वजह से इसे आधुनिक परंपरा का भी नाम दिया जाता है|  आजकल के समय में इसे बड़े ही व्यापक स्तर पर मनाया जाता है और लोगों के बीच में भी ज्यादा हर्ष उल्लास देखा जाता है लेकिन एक बात यह भी देखी गई है कि इस पर्व के लिए लोगों के बीच में अब ज्यादा पाबंदी नहीं हैं। 

अगर प्राचीन समय की बात की जाए तो पहले के लोग नियमित रूप से इस दिन  रोजा  जरूर रखते थे लेकिन आज के समय में बदलाव आ चुके हैं और यह जरूरी नहीं है कि रोजा रखा ही जाए और देखा जाता है कि बहुत ही कम लोग आज के समय में रोजा रखते हैं लेकिन इस्लाम धर्म में कोशिश  की जाती है कि इस  दिन ज्यादा से ज्यादा लोग रोजा रखें ताकि लोगों के बीच में इस महान पर्व के बारे में भी चर्चा की जा सके और आने वाली इस्लामी   पीढ़ी को भी इसके बारे में जानकारी दी जा सके|

 इस दिन को माना जाता है सबसे पवित्र दिन

इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार  शब – ए– मेराज ( shab e meraj के दिन को सबसे पवित्र दिन कहा गया है जहां हर इंसान खुशी खुशी इस दिन को उल्लास पूर्वक बनाता है और बिना किसी भेदभाव के सब के साथ हंसी-खुशी मिलता है| इस दिन लोग इबादत करके अपना पूरा दिन निकालते हैं और खुद  के एवं  परिवार के लिए अल्लाह के आगे दुआएं मांगते हैं|

अंतिम शब्द

इस प्रकार से आज हमने इस्लामिक कैलेंडर के माध्यम से मनाए जा रहे शब–  ए– मेराज ( shab e meraj के बारे में संपूर्ण जानकारी आपको देने की कोशिश की है जिसके माध्यम से आप ही इस धर्म के बारे में और  पवित्र दिन के बारे में जानकारी ले सकें| अगर आप भी इस्लामिक धर्म से नाता रखते हैं, तो इस दिन खुद को शुद्ध और पवित्र करके आगे बढ़ना चाहिए ताकि  अल्लाह आपको बरकत दे और किसी प्रकार की दिक्कत आने पर उसका सामना करने की भी हिम्मत दे|

 उम्मीद करते हैं आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा इस अंत तक पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद| 

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