शिरडी साईं बाबा | साईं बाबा का इतिहास | sai baba hindi

साईं बाबा का इतिहास ,  संपूर्ण जानकारी

आज के समय में लोगों की मान्यताएं कई  हद तक आगे बढ़ती नजर आती हैं जहां लोग अपना विश्वास कई प्रकार से व्यक्त करते हैं और  अपनी मनोकामना की पूर्ति करते नजर आते हैं|  भारत में कई सारे देवी देवताओं का वास है और हर जाति, समुदाय के लोग अपनी इच्छा अनुसार देवी देवताओं की पूजा और अर्चना करते हैं|  ऐसे में आजकल कुछ दशकों से साईं बाबा का नाम बहुत ही  भक्ति भावना  से लिया जाता है जिसके माध्यम से लोगों के अंदर एक नई ऊर्जा  का संचार होने लगता है| 

 ऐसे में आज हम आपको श्री साईं बाबा के बारे में संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं, जो निश्चित रूप से ही आपके  लिए लाभप्रद होंगे|

साईं बाबा का जन्मम

sai baba

साईं बाबा ( sai baba ) के जन्म के पीछे कई सारी मान्यताएं हैं और एक हद तक लोगों को उनके सही जन्म की तारीख मालूम नहीं है फिर भी कुछ  लोगों के माध्यम से ऐसा कहा जाता है कि साईं बाबा का जन्म 28 सितंबर 1835 को हुआ था|  उन्हें उनके कर्मों की वजह से भारतीय गुरु, संत एवं फकीर के रूप में जाना जाता है जिनकी देश भर में यहां तक विदेशों में भी हजारों और लाखों की संख्या में  अनुयाई है,  जो साईं बाबा के रास्ते पर चलते हुए आगे बढ़ते हैं|  साईं बाबा की मृत्यु 15 अक्टूबर 1918 को बताई गई है|

साईं बाबा के माता पिता

उनके जन्म के जैसे ही साईं बाबा ( sai baba ) के माता-पिता के बारे में भी कोई सच्ची जानकारी उपलब्ध नहीं है फिर भी कुछ विवरण के आधार पर ऐसा कहा जाता है कि उनके पिता का नाम श्री गंगा बाबरिया एवं माता का नाम  देवगिरी  अम्मा  था|  उनके माता-पिता भगवान शिव के परम भक्त थे और साईं बाबा का जन्म  शिव जी का आशीर्वाद मानते थे। ऐसा माना जाता है कि जब साईं बाबा जी का जन्म हुआ था तब  उनके माता-पिता  उनको  एक फकीर को दान कर दिया था इसके बाद से ही साईं बाबा के नाम के आगे बाबा लगना शुरू हो गया और उनकी देखरेख भी  उस फकीर ने  की थी|

साईं बाबा का बचपन

साईं बाबा ( sai baba ) जी एक कुशाग्र बुद्धि के बालक  थे, जिन्हें हर प्रकार के धर्म ग्रंथों में रुचि थी और हमेशा  वह  अलग  अलग   मंदिर या मस्जिद  मैं जा कर पूजा अर्चना किया करते थे जिसकी वजह से उनसे ना ही हिंदू   पसंद   करते  थे और ना ही मुसलमान|  उनकी हरकतों की वजह से लगातार उनकी शिकायत उनको पालन पोषण देने वाले फकीर के पास होती थी जिससे उन्होंने भी गुस्सा करते हुए उन्हें घर से निकाल दिया और उसके बाद से ही  साईं बाबा ने  अलग-अलग जगहों पर  आश्रय लिया और  ज्ञान का  विस्तार  भी किया|

साईं बाबा जी का कब हुआ शिर्डी में आगमन

ऐसी मान्यता है कि जब साईं बाबा जी 16 वर्ष के थे, तब उन्हें शिर्डी के ही किसी नीम के पेड़ के नीचे पहली बार देखा गया था और जहां पर उन्होंने अपना निवास काफी दिनों तक किया और उसके बाद अचानक गायब हो गए।  ऐसा माना जाता है कि  एक बार  शिरडी  आने के  बाद  साईं बाबा ( sai baba ) जी को यह जगह बहुत पसंद आई उन्होंने शिर्डी में रहना शुरू कर दिया था|  यहीं पर रहकर उन्होंने कई सारे नेक कार्य किए और लोगों को भी जागरुक करने का कार्य किया|  लोग भी उनसे प्रभावित होकर अपनी सही दिशा का चुनाव करने लगे और जिससे पूरे शिर्डी में साईं बाबा की जय जयकार होने लगी थी|

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कैसे मिला साईं नाम

साईं नाम मिलने के पीछे भी एक कथा प्रचलित है जिसके अंतर्गत  ऐसा कहा जाता है कि एक बार साईं बाबा किसी बारात के साथ शिर्डी आ गए थे जहां पर एक श्रद्धालु व्यक्ति ने उन्हें साईं कह कर संबोधित कर दिया और उसके बाद से ही वे और लोगों के लिए भी साईं बाबा के नाम से प्रचलित हो गए थे|  आज  भी सभी उन्हें साईं बाबा के नाम से पुकारते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं|  धीरे-धीरे विदेशों में भी लोग उन्हें  “साईं”  के नाम से ही  जानने  लगे थे|

साईं बाबा के बारे में कुछ मुख्य मान्यताएं

साईं बाबा ( sai baba ) के बारे में कई सारी मान्यताएं प्रचलित है, जो आज भी लोगों के द्वारा पढ़ी और सुनी जाती हैं|

  1. हमेशा ऐसा माना गया कि साईं बाबा ( sai baba ) के पास कुछ   देवी शक्तियां प्राप्त थी क्योंकि उन्हें कभी भी ठंड और गर्मी नहीं लगती थी और वह सिंपल से एक ही कपड़े में अपना पूरा समय व्यतीत कर देते थे|
  2.  ऐसा माना जाता है कि वह रात में कभी भी नहीं डरते थे और दिन में किसी से मिलना नहीं चाहते थे|
  3.  उन्होंने हमेशा लोगों को प्यार, दया, मदद, शांति, कल्याण और भक्ति पाठ का ज्ञान दिया जिसे लोगों ने भी बढ़-चढ़कर  आत्मसात किया|
  4.  उनके जन्म को लेकर कई सारी मान्यताएं देखी जाती हैं जिनमें ऐसा भी कहा गया है कि उन्होंने ब्राह्मण परिवार में जन्म लिया था लेकिन बाद में माता-पिता द्वारा  उन्हें  फकीर को दान कर दिया गया था|
  5.  साईं बाबा की बातों को सुनकर  कुछ  लोग उन्हें पागल भी कहते थे और लोगों को उनके प्रति  भड़काया भी करते थे| 
  6.  साईं बाबा ( sai baba )  अपना समय  मंदिर और मस्जिद में बिता दिया करते थे और वहां पर अपने हिसाब से चला करते थे जिससे उनसे कई लोग नाराज ही रहा करते थे|
  7.  साईं बाबा ( sai baba ) हमेशा श्री कृष्ण के भजन का जाप किया करते थे और लोगों को भी श्रीकृष्ण के भजनों को  सुना कर जागरूक करने का काम किया करते थे|

शिर्डी का प्रसिद्ध साईं बाबा मंदिर

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आप सभी ने शिर्डी का साईं मंदिर के दर्शन जरूर किए होंगे, जिसकी अनुपम कलाकृति देखते ही बनती है जहां पर  सकारात्मक ऊर्जा  बहुत ही प्रभावशाली मानी जाती है और लोग यहां आकर खुद को धन्य समझते हैं|   शिर्डी के साईं बाबा को प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है जहां पर साईं बाबा की समाधि के ऊपर हमेशा लोगों को दया, प्रेम, करुणा भाव से रहने की सलाह दी जाती है|

 ऐसा माना जाता है कि शिर्डी के साईं मंदिर का निर्माण 1922 में किया गया था क्योंकि साईं बाबा ने अपना जीवन शिर्डी मैं ही  रहकर व्यतीत किया और अंत समय में भी वे शिर्डी में ही रह कर   लोगों के बीच में प्रसिद्ध बने रहे|  इस प्रसिद्ध मंदिर का समय सुबह 4:00 बजे से लेकर रात के 11:00 बजे तक है जहां आप कभी भी जाकर दर्शन कर सकते हैं यह मंदिर हर दर्शनार्थी के लिए खुला है और हमेशा यहां पर मन की शांति के लिए लोग पहुंचते हैं| 

साईं बाबा द्वारा दी गई शिक्षा

साईं बाबा ( sai baba ) ने कदम कदम पर अपने भक्तों  को सही शिक्षा दी है, जो  आज भी लोगों को याद है और उनके पद चिन्हों पर चलते हुए लोग उनके शिक्षा को ग्रहण कर रहे हैं|

  1. साईं बाबा ( sai baba ) ने हमेशा लोगों के मन में करुणा, दया,   ईश्वर भक्ति के प्रति जागरूक रहने की शिक्षा दी है|
  2.  उन्होंने हमेशा जातिगत भेदभाव को मिटाकर  लोगों की निंदा करने वालों को यह शिक्षा दी कि हर इंसान बराबर है और भगवान के रहमों करम हर इंसान पर एक जैसी होती है|
  3.  इसके साथ ही साथ  साईं  बाबा ने लोगों को मानवता की शिक्षा दी,  साथ ही साथ उन्होंने अपने माता पिता, गुरु, बुजुर्गों का सम्मान करने की भी  सीख दी है|
  4.  साईं बाबा ने हमेशा धर्म और सत्य की राह  मैं आगे बढ़ने की शिक्षा दी जिससे समाज का कल्याण हो सके और लोगों का भला होता रहे|

साईं बाबा के कुछ अनमोल वचन

साईं बाबा ( sai baba ) ने अपने जीवन में कुछ अनमोल वचन दिए हैं इन के माध्यम से आप भी उन्हें जीवन में आत्मसात करते हुए आगे बढ़ सकते हैं|

  • “ मैं केवल शरीर नहीं हूं मैं अजर अमर अविनाशी परमात्मा हूं, इसलिए हमेशा जीवित रहूंगा|  यह बात भक्ति और प्रेम से कोई भी भक्त अनुभव कर सकता है|”
  • “ मनुष्य को हमेशा अपने वर्तमान में जीना चाहिए क्योंकि हर क्षण के विचार और  मुख्य  मायने रखते हैं साथ ही साथ भविष्य  के मार्ग  की रूपरेखा भी तय होती है|”
  • “ जीवन एक गीत है, इसे  गाओ| यह एक खेल है, इसे खेलो| यह एक चुनौती है, इसका डटकर सामना करो| यह  एक सपना है, इसे अनुभव करो| यह एक यज्ञ है, इसे पेश करो एवं यह प्यार है इस का आनंद लो|”
  • “  जितने तारे होते हैं, वह सभी विचारों के ही परिणाम होते हैं इसीलिए व्यक्ति के  विचार  मायने रखते हैं|”

अंतिम शब्द

इस प्रकार से हमने जाना कि श्री साईं बाबा ( sai baba ) देश  हि नहीं अपितु विदेशों में भी पूजनीय है|  जगह-जगह पर इनके मंदिर बनाए गए हैं जिसमें लोग आकर दर्शन करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं|  उनके द्वारा दी गई सकारात्मक सोच के माध्यम से लोग आज भी शिक्षा ग्रहण करते हैं और किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर उनके समक्ष जाकर समस्या बताते हैं|  गुरुवार  को उनका विशेष दिन माना जाता है,  ऐसे में अगर आप भी  साईं बाबा की शिक्षा ग्रहण करते हुए उसे अपने जीवन में आत्मसात करते हैं, तो निश्चित रूप से आपको फायदा होगा और आपके जीवन में एक नई सकारात्मकता आ जाएगी| 

 जीवन में चल रही उथल-पुथल भी साईं बाबा की पूजा से दूर होती है और एक नई ऊर्जा एवं ताजगी बनी रहती है|

 उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह पसंद आएगा  और इसे अंत तक  पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद|

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