Krishna Sobti – कृष्णा सोबती का जीवन परिचय

Krishna Sobti

हमारे देश भारत में कई प्रकार के अमूल्य लेखकों का जन्म हुआ जिन्होंने अपनी लेखनी से लोगों को जागरूक करने का काम किया है|  साथ ही साथ उन्होंने अपनी बेबाक लेखन शैली से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है|  हमने आपको कई ऐसे लेखकों, कवियों के बारे में बताया है जिन्होंने देश  को आगे बढ़ाने में अपना भरपूर योगदान दिया है|  वैसे भी एक लेखक की कलम को हमेशा सर्वोपरि माना जाता है क्योंकि यह स्वयं के  माध्यम से अपने अंदर छिपे हुए बात को निकालने का काम करते हैं जो सीधे ही लोगों के दिल तक जाती है|  इसी कड़ी में एक  ऐसा नाम पर है जिन्होंने अपने कलम से लोगों को जागरूक करने का काम बखूबी निभाया है इनका नाम है  Krishna Sobti|

 आज हम आपको  Krishna Sobti के किसी के बारे में संपूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं, जो निश्चित रूप से आपके लिए फायदेमंद होंगे|

कृष्णा सोबती का जन्मम

Krishna Sobti

Krishna Sobti का जन्म  18 फरवरी 1925 को गुजरात में हुआ था|  इस समय में उनके जन्म  की जगह अब पाकिस्तान में सम्मिलित है| जब  विभाजन के बाद जब भारत आई तो उन्होंने दिल्ली में ही रहने का निश्चय किया और उसके बाद दिल्ली से ही उन्होंने साहित्य के  बारे में सिखा और जाना |  धीरे-धीरे उनका काम लोगों को पसंद आने लगा और दिल्ली में ही रहकर अपने कार्य को अंजाम देने लगी|   कृष्णा सोबती  की मृत्यु  25 जनवरी 2019 को 93 वर्ष की उम्र में  हुआ|

उनके बचपन की खास सुनहरी यादें

 जिस हमारे बचपन की यादें बुढ़ापे तक हमारे साथ रहती हैं इसी प्रकार कृष्णा सोबती की भी कई खूबसूरत बचपन की यादें हैं जिन्हें कई सारी किताबों में भी उल्लेख किया गया है|  बचपन में कृष्णा सोबती को पेस्ट्री, चॉकलेट , चना, अनारदाना बहुत पसंद था|  उन्होंने तो अनार दाने का पाउडर बनाकर  खाना शुरू किया  जो उन्हें खास पसंद  था|  परिवार के लोग  बचपन से ही उन्हें जी जी कहकर बुलाते थे जो उन्हें बहुत अच्छा लगता था|  खुद को सभी में बड़ा मानती थी और इसीलिए वह खुद को बुआ, दीदी कहना पसंद करती थी|  वह हमेशा डार्क कलर के कपड़े पहनती थी|  ऐसा सोचती थी कि उन पर  ऐसे रंग ज्यादा अच्छे लगते हैं | हर शनिवार को उन्हें ऑलिव ऑयल पीने के लिए दिया जाता था जो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं था और हमेशा इस तेल को पीने के लिए  मना किया करती थी|  रविवार के दिन उनके यहां जूतों को  पॉलिश करने का प्रावधान था,  जिसे घर के हर बच्चे किया करते थे| धीरे-धीरे बचपन की यादें धूमिल होती चली गई और उनकी पसंद मैं किसी और की जगह ले ली|

कृष्णा सोबती की प्रमुख रचनाएं

Krishna Sobti की रचनाएं दिल को छू जाने वाली होती है, जो उनकी बेबाक लेखन शैली को बताती है|  इनमें से कुछ प्रमुख रचनाएं निम्न है–

  1. बादलों के घेरे
  2.  हार से पिछड़ी
  3.  तीन पहाड़
  4.  मित्रो मरजानी
  5.  सिक्का बदल गया 
  6. बदली बरस गई
  7. सूरजमुखी अंधेरे के
  8.  जिंदगीनामा
  9.  यारों के यार तीन पहाड़
  10.   सोमती एक सोहबत
  11. मुक्तिबोध
  12.  शब्दों के आलोक में
  13.  मार्फत दिल्ली
  14.  हम  हस मत
  15. लेखक का जनतंत्र
  16.   बुद्ध का कमंडल

कृष्णा सोबती को मिलने वाले प्रमुख पुरस्कार

Krishna Sobti ने अपने जीवन काल में कई सारी ऐसी रचनाओं का निर्माण किया है जिसके लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया|  देश के अग्रणी लोगों को भी काफी  पसंद आती थी|

  • 1980 में जिंदगीनामा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त हुआ
  •  2017 में ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त हुआ
  •  2001 में  शलाका  सम्मान से सम्मानित किया गया
  •  2017 में 53th ज्ञान पुरस्कार दिया गया|

पाठकों की विभिन्नता का कथाकार

Krishna Sobti की लिखी गई रचना  हमेशा लोगों को काफी पसंद आए| उनकी लिखी गई रचना ‘’ मित्रो मरजानी’’  लोगों को काफी ज्यादा पसंद आई थी इसके अलावा उन्हें हिंदी साहित्य  का एक रत्न के रूप में जाना जाता था|  ऐसा भी माना जाता था कि उस समय लोग उनके काम की वजह से उनका नाम लेने से डरते थे|  हालांकि  ऐसा  डर कुछ सीमित वर्ग के  साथ ही था| जब भी वह किसी रचना को पूर्ण करती थी तो उनके मन में किसी प्रकार का  डर नहीं होता था और ना ही किसी भी प्रकार का अपराध बोध|  ऐसा माना जाता था कि उनकी लिखी गई रचना  बड़ी बेबाकी से लिखी गई है|

 उनकी रचनाएं  कुछ इस प्रकार की होती थी  जिस ने भी उन्हें पढ़ लिया हो अपने चारों तरफ एक स्वतंत्रता का माहौल पैदा हो जाता था जो उनकी रचनाओं के लिए सकारात्मक प्रभाव के रूप में देखा जाता है|

कृष्णा सोबती उनकी रचनाओं में होने वाले विवाद

Krishna Sobti की कई सारी रचनाओं या  कहानियों को लेकर कई सारे विवाद देखे गए हैं उस समय के हिसाब से ऐसी मानसिकता वाला लेखन करना  किसी भी स्त्री के लिए  आम बात नहीं थी| ऐसा माना गया कि  कृष्णा सोबती की कहानियां मैं यौन कुंठा उनके पात्रों पर छाई रहती है| कई सारे दूसरे रचनाकारों ने उनकी काबिलियत पर सवाल उठाया था | समय के साथ सब कुछ ठीक होता चला गया और कृष्णा सोबती अपने काम में सफलता हासिल करती चली गई।

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Krishna Sobti अपने काम में बेहद माहिर मानी जाती थी उनके द्वारा रचित कहानियां लोगों को काफी पसंद आने लगी थी|  आमतौर पर  वह एक  गद्द  लेखिका थी जो अपनी रचनाओं में महिलाओं को  जागरूक करने का  संदेश दिया करती थी|  कई बार उनका यह समाज  सुधारकों को पसंद नहीं आता था लेकिन कृष्णा सोबती को इस बात का कोई फर्क नहीं पड़ा और वे अपनी लेखनी को सुदृढ़ करने में लगी रही|  उनके जीवन में कई प्रकार के  उतार-चढ़ाव आए लेकिन उन्होंने कभी दूसरों की बातों पर ध्यान नहीं दिया| उन्होंने अपनी लेखन शैली को हमेशा सर्वोपरि रखा जो लोगों के दिलों तक जाती थी| 

 कभी-कभी ऐसा भी होता है कोई लेखक अपनी संस्कृति को लेकर  आगे बढ़ता है|  कृष्णा सोबती की  कहानियों में भी हमें  यह पहलू देखने को मिला है| आजादी के कुछ पहले से ही उन्होंने लिखना शुरू किया था लेकिन धीरे-धीरे उनकी रचनाओं ने उन्हें रुकने नहीं दिया और वे आगे बढ़ती चली गई| 

स्त्रियों को आगे बढ़ाने में है उनका प्रमुख योगदान

Krishna Sobti कभी भी किसी से डर नहीं रखती थी और हमेशा स्त्रियों की भलाई के लिए ही कार्य करती रहे|  कई बार दूसरे लेखक इस बात से डर जाते थे  क्योंकि उन पर किसी ना किसी का दबाव बना रहता था। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि वे  एक अटूट साहस और संघर्ष जीविता की लेखिका थी जो कभी भी स्त्री को हारने नहीं देना चाहती थी। उनके लिखे गए  कहानी में भी आपने गौर किया होगा कि वह हमेशा इस प्रकार से खुद को लोगों के सामने पेश करती हैं जिससे लोगों को उनसे कुछ ना कुछ सीखने को जरूर मिल जाता है|  उनकी रचनाओं से लोगों को भी काफी बल मिला खासतौर से महिलाओं को|  उनकी हर रचना या कहानी एक दूसरे से जुदा होती है जो हमारा ध्यान अपनी ओर खींच लेती है| 

अंतिम शब्द

इस प्रकार से हमने जाना कि कृष्णा सोबती भारत की जानी-मानी लेखिका है जिनका नाम ना सिर्फ भारत बल्कि विदेशों में भी जाना जाता है|   उनकी बेबाक लेखन क्षमता को आज भी लोग याद करते हैं| Krishna Sobti ने इस दुनिया से अलविदा कहते हुए खुद को  स्थापित  पूर्ण रूप से किया है|  उनकी हर कहानी हमें कोई नहीं सीख  देती है, जो हमें पूर्णता का एहसास भी कराती है|

 उम्मीद करते हैं आपको हमारा ये लेख पसंद आएगा धन्यवाद|

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