जलियांवाला बाग हत्याकांड पर निबंध | jallianwala bagh hatyakand information

जलियांवाला बाग की कहानी

jallianwala bagh
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इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसे किस्से दर्ज हैं जिन्हें सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं और  जिनके बारे में आज भी लोगों के मुंह से बातें सुनाई देती है। हमारे देश भारत में भी इसी प्रकार की कई घटनाक्रम देखे गए हैं, जहां पर इतिहास  ने खुद को दोहराया है और देशवासियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया है। कुछ घटनाक्रम ऐसी है, जो हर देशवासी के अंदर एक देश प्रेम की भावना को जगाती है साथ ही साथ हम सब एक हैं के भाव को भी दर्शाती हैं। आज हम आपको एक ऐसे घटनाक्रम की बात बताने जा रहे हैं जो आप सभी के लिए जानना बहुत जरूरी है एवं इतिहास के पन्नों में इसे विशेष दर्जा प्राप्त है। यह मुख्य घटना है जलियांवाला बाग jallianwala bagh की कहानी।

 आज हम आपको जलियांवाला ) बागjallianwala bagh हत्याकांड की कहानी बताने जा रहे हैं, जो कहीं ना कहीं हर भारतीय के दिल में आज भी बसी हुई है।

जलियांवाला बाग हत्याकांड कब और कहां हुई

ऐसे तो आप सभी ने इस हत्याकांड के बारे में पढ़ा या सुना जरूर होगा लेकिन आज हम आपको इसके बारे में संपूर्ण जानकारी देंगे। जलियांवाला बाग ( jallianwala bagh ) हत्याकांड भारत के पंजाब प्रांत में अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के निकट जलियांवाला बाग ( jallianwala bagh में 13 अप्रैल 1919 को हुआ था। उस दिन संपूर्ण देश में बैसाखी का उत्सव मनाया जा रहा था लेकिन किसी को भी यह ज्ञान नहीं था कि इस पवित्र दिन को इतिहास का काला दिन माना जाएगा।

 इस घटना को अंजाम दिया गया जब भारतीय क्रांतिकारी रोलेट एक्ट का विरोध करने के लिए जलियांवाला बाग { jallianwala bagh } में सभा का आयोजन कर रहे थे और उसी समय अंग्रेज ऑफिसर जनरल डायर ने आकर बिना किसी वजह, बिना किसी कारण के वहां पर उपस्थित लोगों पर धड़ाधड़ गोलियां चला दी। जनरल डायर के कारण किए गए गोलीबारी की वजह से लगभग 500 लोगों की मृत्यु हो गई और ढाई हजार लोग घायल हो गए थे। जिसमें पुरुष, नाबालिक लड़के और छोटे बच्चे भी शामिल थे। सरकारी आंकड़ों में इन्हें कम संख्या में दर्शाया गया है लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि आंकड़ों को छोड़कर भी कई लोग इस दर्दनाक हत्याकांड में मारे गए और शहीद हो गए।

jallianwala bagh हत्याकांड के बारे में विवरण

13 अप्रैल 1919 का अमृतसर का वह हत्याकांड जिसमें देश के कुछ बड़े नेता भी पहुंचे हुए थे और देश की जनता को भाषण देने का काम कर रहे थे  क्योंकि उस दिन बैसाखी का त्यौहार था तो  लोग अपने परिवार के साथ घूमने और मेला देखने के लिए ही  निकले हुए थे और इस वजह से उस बाग में भी कई सारे लोगों का जमावड़ा देखा गया। जब नेताओं का भाषण हो रहा था और देश की जनता उन्हें गौर से सुन रही थी उसी समय जनरल डायर ने आकर 90 ब्रिटिश सैनिकों  के साथ गोलीबारी शुरू कर दी और जिसमें राइफल और बंदूकों का खास इस्तेमाल किया गया और साथ ही साथ वहां से किसी को भी जाने की इजाजत नहीं दी गई और एक के बाद एक लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया।

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 ऐसा माना जाता है कि लगभग 10 मिनट में ही 17  हजार राउंड गोलियां चला दी गई और वहां से भागने का कोई रास्ता नहीं था इसलिए लोग पास में ही बने कुएं में कूदकर खुद की जान बचाने की योजना बनाने लगे लेकिन एक के बाद एक कुएं में लोगों के  कूदे  जाने की वजह से वह कुआं पूरी तरह से  लाशो से पट चुका था और इस दर्दनाक घटना को आज भी इतिहास के काले दिन के रूप में याद किया जाता है।

इस घटनाक्रम के बाद जनरल डायर ने दिया था बेतुका बयान

इस घटनाक्रम के बाद जब जनरल डायर  ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को टेलीग्राम करते हुए बताया कि उसकी मंशा वहां पर उपस्थित भारतीयों पर गोली चलाना नहीं था बल्कि उसने हमला तब किया जब भारतीय फौज ने जनरल डायर पर हमला किया और उसे बचने के लिए गोलियां चलानी पड़ी जिस पर जनरल रेजीनाल्ड डायर से कहा कि उन्होंने बिल्कुल सही किया हालांकि यह बात सभी भारतीय जानते थे कि जनरल डायर  ने  ऐसा जानबूझकर किया था जिससे कि वे लाखों भारतीयों को नुकसान पहुंचा सकें|  इतिहास के पन्नों में यह सच्चाई दफन हो चुकी है|

 jallianwala bagh ) हत्याकांड की हुई थी सर्वोपरि  निंदा

jallianwala bagh

जब जलियांवाला बाग jallianwala bagh हत्याकांड को अंजाम दिया गया उसके बाद जनरल डायर की सर्वोपरि निंदा हुई थी और उसके बाद इसकी जांच के लिए हंटर कमीशन नियुक्त किया गया जिसमें जनरल जनरल डायर ने यह स्वीकार भी किया था की गोली चलाकर लोगों को मार देने का निर्णय पहले से ही कर लिया गया था और उन लोगों  के सामने दो तोपो  को लाकर भी खड़ा कर दिया गया था जिससे कि लोग भाग ना सके|  जब इस जांच की रिपोर्ट आई थी उसके बाद स्वास्थ्य कारणों की वजह से जनरल को ब्रिटेन भेज दिया गया और भारत नहीं बुलाया गया|

इस हत्याकांड की वजह से  भारत के शीर्ष नेताओं ने जताया विरोध

जलियांवाला बाग jallianwala bagh हत्याकांड को घोर निंदा का सामना करना पड़ा जिससे हमारे देश के नेताओं ने भी विरोध दर्शाया था|  जिसमें रविंद्र नाथ टैगोर ने अपनी नाइटहुड की उपाधि को वापस कर दिया  और उन्होंने भी जमकर इस दर्दनाक घटना क्रम का विरोध किया|  देशवासियों के मन में देश प्रेम कभी कम नहीं हुआ और घटनाक्रम के बाद तो लोगों के सिर पर आजादी का भूत और भी उग्र होकर सवार हो गया जिसके बाद बच्चे हो या बड़े हो या बुजुर्ग सभी इस आजादी की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर कूद पड़े जिसके फलस्वरूप 1920 में गांधी जी ने असहयोग आंदोलन प्रारंभ किया था|

जलियांवाला बाग हत्याकांड की निशानियां

अगर आप आज भी जलियांवाला बाग ( jallianwala bagh हत्याकांड के उस जगह पर जाएंगे जहां पर यह हत्याकांड किया गया था, तो आपको वहां की दीवारों पर आज भी गोलियों के निशान बल्कि गोलियां भी दिखाई देंगी|  जनरल डायर के सैनिकों ने जहां पर भी बुलेट से लोगों पर वार किया तो आसपास बनी दीवार और खिड़कियों पर आज भी बुलेट दबी हुई मिल जाती हैं| लोग अपनी जान बचाने के लिए जिस कुएं में कूदे थे आज भी उस  कुए  को एक स्मारक के रूप में रखा गया है जिससे आने वाले लोग देश के शहीदों को याद  कर सके|

100 साल के बाद भी याद है जलियांवाला की स्मृति

आज जलियांवाला हत्याकांड को लगभग 100 वर्षों से भी अधिक हो चुके हैं उसके बाद भी जब भी 13 अप्रैल का महीना आता है, तो लोगों के जहन में 1919 की जलियांवाला बाग ( jallianwala bagh हत्याकांड  याद आ जाती है जब लोगों को बेतहाशा मारते हुए अपराध को अंजाम दिया गया था|   अगर पुराने बुजुर्गों से इस बारे में बात कर ली जाए तो उनके मन में आज भी उस दिन की याद ताजा है जब उन्होंने अपने किसी रिश्तेदार या दोस्त को इस दर्दनाक हादसे में गवा दिया हो| 

माना जाता है इतिहास का काला दिन

13 अप्रैल 1919 को हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड में हजारों लोगों की मौतें हुई और कई लोग घायल हुए इस वजह से इस दिन को इतिहास के काले दिन के रूप में जाना जाता है क्योंकि उस दिन कई मासूम लोगों की हत्याएं की गई जिन्होंने किसी भी प्रकार का गुनाह ना किया हो और ना ही किसी का दिल दुखाया हो| यह ह्रदय विदारक घटना रोंगटे खड़े कर देने वाली है, जो कहीं ना कहीं हर भारतीय के दिल में आज भी जुनून और जोश पैदा करती है|

अंतिम शब्द 

इस प्रकार से आज हमने  इतिहास के उस काले दिन को याद किया जो भारत के लिए बहुत ही सर्वनाश का दिन साबित हुआ|  जलियांवाला बाग ( jallianwala bagh हत्याकांड के बाद लोगों के मन में अपने देश के प्रति शहादत और श्रद्धा जाग उठी और लोगों को जल्द से जल्द आजादी मिलने का इंतजार होने लगा|  अंग्रेजों ने भारत के ऊपर कई प्रकार का दबाव बनाया और कई तरह से लोगों को परेशान किया लेकिन इस हत्याकांड के बाद अंग्रेजों  का हर तरफ विरोध हुआ और उन्हें घोर निंदा सहन करनी पड़ी| 

 उम्मीद करते हैं आपको हमारा  यह  लेख पसंद आएगा इसे अंत तक पढ़ने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद|

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