Ishwar Chandra Vidyasagar | ईश्वर चंद्र विद्यासागर के गुण

ईश्वर चंद्र विद्यासागर का जीवन परिचय 

प्राचीन काल से ही हमारे भारत देश में कई सारे ऐसे  महान व्यक्तित्व का जन्म हुआ है जिसके माध्यम से समाज को एक नई दिशा देखने को मिली है| जिनके द्वारा दी गई  सीख से  हम अपने जीवन में भी उन्हें  अनुसरण करते हुए आगे बढ़ सकते हैं| ऐसे व्यक्ति  सामान्य रूप से  उच्च  विचार शीलता और  अपने काम के प्रति  समर्पित होते हैं, जो समाज के कई  दकियानूसी बातों को  पीछे छोड़कर आगे बढ़ने का दम रखते हैं और इससे समाज में कई लोगों को प्रेरणा मिलती है और वे  एक नए पथ की ओर अग्रसर रहते हैं|  उनमे से एक मुख्य दार्शनिक  समाज सुधारक है Ishwar Chandra Vidyasagar|

 अगर हम Ishwar Chandra Vidyasagarके जीवन के बारे में सही तरीके से संपूर्ण अध्ययन करें तो हमें उनसे कई सारी शिक्षाप्रद बातें सीखने को मिलती हैं|  हमारे आर्टिकल को पूरा पढ़ें जिससे आपको  पूरी जानकारी मिल सके|

Ishwar Chandra Vidyasagar का जन्म

Ishwar Chandra Vidyasagar

श्री Ishwar Chandra Vidyasagar को एक महान समाज सुधारक के रूप में जाना जाता है|  साथ ही साथ उन्होंने समाज  के लोगों को भी एक नई दिशा देने का काम किया है|  श्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी का जन्म 26 सितंबर 1820 को मेदिनीपुर में हुआ था|  उनके पिता  का नाम श्री ठाकुरदास बंधोपाध्याय तथा माता का नाम श्रीमती भगवती देवी था|  वे एक महान लेखक, अनुवादक, प्रकाशक और परोपकारी इंसान के रूप में जाने जाते थे|  उन्हें संस्कृत भाषा का अच्छा खासा ज्ञान था या आप यह कह सकते हैं कि संस्कृत और बांग्ला भाषा के उन्हें  ज्ञाता के रूप में जाना जाता था|  संस्कृत भाषा का बहुत अच्छा ज्ञान होने की वजह से उन्हें  कॉलेज में ही’’ विद्यासागर’’ की उपाधि दे दी गई थी|  जिसके बाद से ही लोगों में उनकी ख्याति इसी नाम से हुई| इनकी मृत्यु  29 जुलाई 1891  को हुई ।

[ Ishwar Chandra Vidyasagar ] ईश्वर चंद्र विद्यासागर की शिक्षा

Ishwar Chandra Vidyasagar हमेशा पढ़ाई में अव्वल रहते थे उन्होंने कोलकाता से संस्कृत विद्यालय में पढ़ाई की|  साथ ही साथ उन्होंने अंग्रेजी भाषा में भी शिक्षा ग्रहण की|  उन्हें बंगाली भाषा का भी अच्छा खासा ज्ञान था|  इसके बाद कॉलेज में   उन्हें न्याय दर्शन की परीक्षा  में पास होने पर  ₹100 रुपए और संस्कृत की रचना करने पर ही ₹100  रुपए का इनाम दिया गया।  इसके अलावा पढ़ाई में अच्छा होने पर उन्हें छात्रवृत्ति भी दी जाती थी  जिसका उपयोग वे मददगार को देने में करते थे|

नारी शिक्षा के थे महान समर्थक

  19वीं सदी में नारियों  के साथ बहुत ज्यादा भेदभाव किया जाता था और उन्हें शिक्षा देने का भी अधिकार नहीं था|  घर  के लोग ही नारियों के साथ भेदभाव  किया करते थे और उन्हें बाहर जाने की भी मनाही होती थी| ऐसे समय में भी श्री Ishwar Chandra Vidyasagar ने नारी शिक्षा के लिए पुरजोर कोशिश की और हर घर की बालिकाओं को शिक्षा देने पर जोर दिया|  इसके अलावा उन्होंने विधवाओं को भी शिक्षा देने की बात की और लगातार कोशिश करते रहे जिससे कि 1856    मैं एक लोकमत प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें विधवा पुनर्विवाह कानून पारित हुआ|   सामान्य रूप से देखा जाता है कि उस समय भी विधवाओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जाता था हमेशा उन्हें नीची नजरों से देखा जाता था और हर वक्त दुर्व्यवहार का  डर विधवा को लगा रहता था|  ऐसे समय में Ishwar Chandra Vidyasagar द्वारा  पारित किया गया विधवा पुनर्विवाह कानून  विधवाओं के लिए एक वरदान साबित हुआ|  इन  सब कार्यों का पूरा श्रेय ईश्वर चंद्र विद्यासागर को जाता है|  उन्होंने अपने इकलौते पुत्र श्री नारायण चंद्र बंधोपाध्याय का विवाह भी एक विधवा स्त्री से किया था जो उनकी उच्च मानसिकता को दर्शाता है| 

Ishwar Chandra Vidyasagar ने किया बांग्ला भाषा का विस्तार

श्री ईश्वर चंद्र विद्यासागर का बांग्ला भाषा में जबरदस्त पकड़ थी  और वह बांग्ला के अध्यापक के रूप में भी उन्होंने कार्य किया|  इसके अलावा किसी को भी अगर बांग्ला भाषा में मदद की आवश्यकता होती थी तो  ईश्वर चंद्र विद्यासागर उनकी जरूर मदद किया करते थे|  उन्होंने हमेशा  बांग्ला भाषा को विस्तार देने का काम किया  जिससे  कई लोगों के मन में भी बांग्ला भाषा के प्रति आदर और सम्मान जागृत हुआ|  बांग्ला भाषा को विस्तार देने के लिए उन्होंने सैकड़ों बांग्ला स्कूलों का निर्माण किया साथ ही साथ रात्रि में भी बांग्ला पाठशाला खोला गया  जिससे  लोगों में इस भाषा के प्रति जागरूकता लाई जा सके|

ईश्वर चंद्र विद्यासागर थे सादगी से ओतप्रोत

वे बहुत ही खुद्दार और सादगी  पसंद इंसान थे|  हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तत्पर रहते थे किसी को भी दिक्कत होने पर हमेशा उसके साथ डट कर खड़े रहते थे|  अगर किसी को भी भाषा सीखने के लिए मदद चाहिए होती थी तो वह हमेशा उसकी मदद करने को तैयार होते थे|  जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच में भी उन्होंने कभी भी अपनी सादगी को नहीं छोड़ा जिस वजह से वे लोगों के बीच खासे लोकप्रिय भी रहे| 

ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रमुख गुण

ईश्वर चंद्र विद्यासागर में कई सारे गुण बहुत ही अच्छे थे

  • सादगी पसंद
  •  न्याय प्रिय
  •  स्पष्ट वक्ता
  •  देशभक्त
  • नारी शिक्षा के समर्थक
  •  विधवा विवाह के  समर्थक
  •  भाषाओं के ज्ञानी
  •  पथ प्रदर्शक

ईश्वर चंद्र विद्यासागर के कुछ प्रमुख अनमोल वचन

वे हमेशा अपने अनमोल वचन के माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुंचा या करते थे,  जो सीधे दिल तक जाकर असर करती थी|

  1. विद्या सबसे अनमोल धन है इसके आने मात्र से ही सिर्फ उतना ही नहीं अपितु पूरे समाज का कल्याण हो सकता है|
  2.  कोई मनुष्य अगर बड़ा बनना चाहता है, तो छोटे से छोटा काम भी करें क्योंकि  स्वावलंबी बनना ही श्रेष्ठ होता है|
  3.  जो व्यक्ति दूसरों के काम ना आए वास्तव में वह मनुष्य ही नहीं है|
  4.  समस्त जीवो में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है क्योंकि उसके पास  विवेक और आत्म ज्ञान होता है|

 मनुष्य कितना बड़ा क्यों ना बन जाए उसे हमेशा अपना अतीत याद रखना चाहिए|

  1.  एक मनुष्य का सबसे बड़ा कर्म दूसरों की भलाई और सहयोग करना है, जो एक संपन्न राष्ट्र का निर्माण करता है|
  2.  संसार में सफल और सुखी वही लोग हैं जिनके अंदर  विनय विद्या से ही आती है|

Ishwar Chandra Vidyasagar द्वारा लिखी गई मुख्य पुस्तकें

श्री Ishwar Chandra Vidyasagar को एक महान लेखक के रूप में भी जाना जाता है जिन्होंने कई सारी पुस्तकों का निर्माण किया है, जो लोगों को आज भी काफी पसंद आती है|

  1. बेताल पंच 1847 
  2. बंगाल आर  1848
  3. जीवन चरित्र 1850
  4.  बोधा डाय  प्रकाशित 1851
  5.   उपकार  मनिका 1851
  6.  कोठा माला 1856
  7. सीता प्रकाशित 1856
  8.  बंगाली समाचार पत्र

समय के थे बहुत पाबंद

श्री Ishwar Chandra Vidyasagar  हमेशा  समय के बहुत पाबंद थे|  जब कोई काम करते थे तो उसे पूरी लगन के साथ और समय रहते करते थे|  कभी भी यह सुनाई नहीं देता था कि उन्होंने समय रहते काम पूरा ना किया हो|  एक बार की बात है उन्हें लंदन में एक सभा को संबोधित करना था|  जैसे ही वे हाल तक पहुंचे तो वहां पर काफी भीड़ लग चुकी थी उन्होंने बाहर खड़े होने का लोगों से कारण पूछा जिससे पता चला कि सफाई कर्मचारी छुट्टी पर है और वह नहीं आया इस वजह से हॉल बहुत गंदा है और साफ-सफाई बिल्कुल नहीं है|  कारण जानते ही ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने बिना समय गवाएं स्वयं  झाड़ू पोछा और साफ सफाई करने लगे|  जिस  को देखकर लोगों ने भी सफाई करना शुरू कर दिया|  देखते ही देखते पूरा हाल एकदम साफ हो गया और  उसके बाद ही ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी ने  सभा को संबोधित किया|  जिससे लोगों ने भी प्रेरणा लेकर समय ना गवाने के बारे में सीखा और उनका अनुसरण किया|

अंग्रेजों को भी दिखा दी थी अपनी सभ्यता

Ishwar Chandra Vidyasagar जी को  अपने देश और उसकी सभ्यता से बहुत प्रेम था और इसी वजह से वे किसी भी गलत बात को सहन नहीं कर पाते थे|  एक बार की बात है ईश्वर चंद्र विद्यासागर किसी अंग्रेज ऑफिसर से मिलने गए|  उस समय ऑफिसर जूता पहने ही टेबल पर पैर रखकर बैठे रहे यह बात ईश्वर चंद्र विद्यासागर को अच्छी नहीं लगी लेकिन  वे चुप ही रहे|  दूसरे दिन फिर से वही अंग्रेज ऑफिसर संस्कृत कॉलेज ईश्वर चंद्र विद्यासागर से मिलने पहुंचे तब उन्हें  सबक सिखाने के लिए विद्यासागर जी ने की चप्पल पहने हुए पैरों को   टेबल पर रख दिया|   यह बात  अंग्रेज ऑफिसर  को अच्छी नहीं लगी और वे वहां से उठकर चले गया और इसकी शिकायत भी कर दी|  इस बारे में ईश्वर चंद्र विद्यासागर जी से पूछा गया तो उन्होंने बड़े ही सटीक तरीके से जवाब दिया कि उन्हें ऐसा लगा कि शायद अंग्रेजों में यही सभ्यता  है और इसीलिए मैंने इस प्रकार  का व्यवहार किया|  उसके बाद ही अंग्रेज ऑफिसर को अपनी गलती का एहसास हुआ और इस तरह से विद्यासागर जी ने अंग्रेजों को अपनी सभ्यता शांतिपूर्वक ढंग से दिखा दी|

अंतिम शब्द

इस प्रकार से हमने जाना कि 19वीं शताब्दी में ईश्वर चंद्र विद्यासागर का विशेष योगदान माना जाता है जिन्होंने समाज के हर क्षेत्र  के लोगों को जागरूक करने का कार्य किया|  लोगों  के ऊपर भी उनका खासा असर रहा जो  उनके व्यक्तित्व से  झलकती थी|  जीवन में संघर्ष करने के बाद भी अपने पथ पर चलते रहे और उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा|   उनके जीवन से हमें प्रेरणा मिलती है, जो हमारे भविष्य के लिए भी आवश्यक  है|

 अगर हम सब भी उनके गुणों को खुद में आत्मसात  करें तो  निश्चित रूप से ही हम अपने जीवन में उपलब्धियां हासिल करते हुए आगे बढ़ सकते हैं और खुद में एक बदलाव लाते हुए अपना रास्ता स्वयं ही चुन  सकते हैं|  उनके द्वारा दी गई शिक्षा के माध्यम से हम अपने जीवन में भी उजाला ला सकते हैं और समाज में खुद  को स्थापित कर सकते हैं| 

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