Gajanan Madhav Muktibodh – गजानन माधव मुक्तिबोध की संपूर्ण जानकारी

Gajanan Madhav Muktibodh की संपूर्ण जानकारी

हमारे देश का हिंदी साहित्य बहुत ही अनूठा है जहां पर आप को नित नए ऐसे लेखक  साहित्यकार मिल जाएंगे जिन्होंने  भारतीय साहित्य को एक नया आयाम दिया है| इनकी प्रसिद्धि ना सिर्फ भारत बल्कि संपूर्ण विश्व में देखी गई है,  जिससे भारत का नाम ऊंचा  हुआ है|  आज हम आपको ऐसे साहित्य मानने वाले   इतिहास कार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी  लेखन  क्षमता से लोगों को आकर्षित किया है और जिनका नाम  आज भी मशहूर लेखकों के रूप  लिया जाता है |  उन महान लेखक का नाम है श्री गजानन माधव मुक्तिबोध| 

आज हम उनके बारे में आपको संपूर्ण जानकारी बताने जा रहे हैं उम्मीद करते हैं आपको पसंद आएगी|

गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म

Gajanan Madhav Muktibodh

Gajanan Madhav Muktibodh का जन्म 13 नवंबर 1917 को मध्य प्रदेश में हुआ। उनके पूर्वज काफी पहले  महाराष्ट्र से आकर मध्यप्रदेश में बस गए थे और उसके बाद से ही उन्होंने अपना कर्म स्थान मध्य प्रदेश को बना लिया था|  उनके दादाजी को हमेशा मुंशी कहकर पुकारा जाता था|  गजानन माधव अपने माता पिता की तीसरी संतान थे  लेकिन उनकी बाकी की दो संतान  ज्यादा दिन तक जीवित नहीं  थी| इस वजह से गजानन मुक्तिबोध को परिवार से बहुत प्यार मिला परिवार वाले उन्हें बाबू साहब कह कर बुलाते थे|  बचपन में उनकी मांग को  आसानी से ही पूरा कर दिया जाता था|  ज्यादा लाड प्यार  मिल जाने की वजह से थोड़े जिद्दी स्वभाव के हो गए थे| 

  Gajanan Madhav Muktibodh का निधन 11 सितंबर 1964 को भोपाल मध्य प्रदेश में हो गया था| 

गजानन माधव मुक्तिबोध का व्यक्तित्व

वे बेहद निडर, निर्भय, ईमानदार व्यक्तित्व वाले व्यक्ति थे महात्मा गांधी के प्रशंसक, कथावाचक  और  एक बेहतरीन लेखक भी थे|  उन्होंने कभी भी मौत से हार नहीं मानी और इसलिए एक साहसी व्यक्तित्व के रूप में ही हमारे सामने दिखाई देते हैं|

उनकी शिक्षा

उनके पिता एक  कोतवाल  थे और इस वजह से उनके पिता का तबादला  कई जगहों पर हुआ जिसका असर उनकी शिक्षा पर भी देखा गया|    वे   मिडिल क्लास की परीक्षा में फेल हो चुके थे  और इसके बाद ही उनका ध्यान पढ़ाई से भंग हो गया था|  1953 के बाद  उन्होंने अपना ध्यान साहित्य की तरफ लगाया और इस तरफ ही ज्यादा से ज्यादा उपलब्धियां हासिल की| 

गजानन माधव मुक्तिबोध की प्रमुख रचनाएं

Gajanan Madhav Muktibodh ने जब से हिंदी साहित्य का हाथ थामा है तब से उन्होंने कई सारी रचनाओं का निर्माण कर दिया है।  उन्होंने कहानी, उपन्यास, साहित्यकार के रूप में लिखा है, जिसे लोगों द्वारा काफी पसंद किया गया|

  1. चांद का मुंह टेढ़ा है
  2.  काठ का सपना
  3.  कामायनी एक पुनर्विचार
  4.  समीक्षा की समस्याएं
  5.  एक साहित्यिक डायरी
  1. अंधेरे में
  2.  एकांतर कथा
  3.  कहने दो उन्हें जो यह कहते हैं
  4.   जब दुपहरी जिंदगी पर
  5.    नाश देवता
  6. बातें लौटना आएंगी
  7.  पता नहीं 
  8. ब्रह्मा राक्षस
  9.  बहुत दिनों से
  10.   बेचैन  चील
  11.   भूल  गलती 
  12.  मुझे कदम-कदम पर
  13.  मुझे पुकारती हुई पुकार
  14. राह चलते हैं अकेले ही सितारे
  15.  मैं तुम लोगों से दूर हूं
  16.  मैं उनका ही होता
  17.  मेरे जीवन की
  18.  विचार आते हैं
  19.  लकड़ी का रावण
  20.  सहर्ष स्वीकारा है
  21.  मृत्यु और कवि

 यह उनकी कुछ मुख्य रचनाएं हैं जिन्होंने लोगों के दिल में  कुछ खास जगह बना रखी है|

Gajanan Madhav Muktibodh की विशेषताएं

Gajanan Madhav Muktibodh हिंदी साहित्य के क्षेत्र में ऐसा नाम थे जिन्होंने  बड़े से बड़े कवियों और लेखकों को  लोहा मानने पर मजबूर कर दिया है|  किसी भी क्षेत्र में गजानन माधव का बोलबाला था|  उन्हें हमेशा एक अच्छे विचार रखने वाले बुद्धिजीवी और संघर्षशील व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है|  काफी सारे दुख और संघर्ष को पार करने  के बाद उन्होंने खुद को साबित किया| आप यह भी कह सकते हैं कि ते हैं कि हिंदी साहित्य को ऊपर उठाने में गजानन माधव जी का अच्छा खासा योगदान है| उन्होंने उस समय के कवियों को भी प्रेरणा देने का काम किया जिससे हम भी आगे चलकर देश के लिए कुछ अच्छा कर सकें|

Gajanan Madhav Muktibodh के बारे में समीक्षकों की राय

Gajanan Madhav Muktibodh जी के बारे में समीक्षकों ने भी अपनी राय दी है|  उनके बारे में हमेशा यह कहा जाता था कि मैं हमेशा एक ही विषय को अलग-अलग रूपों में पेश कर सकते थे और उनकी हमेशा यही कोशिश होती थी कि वह उसमें नए आयामों को जोड़ते हुए लोगों के सामने पेश करें। उनकी लिखी गई रचनाओं में रचनात्मकता दिखाई देती थी जो कविता को एक ही सूत्र में पिरोए रखती थी|  उनकी रचनाएं समीक्षकों को पसंद आती थी लेकिन कभी ना कभी समीक्षक उम्र में कमी निकालने का मौका नहीं छोड़ते थे| उन्होंने अपनी रचनाओं में ऐसी कल्पनाशीलता बना रखी थी जिससे लगता था कि लिखा जाने वाला पात्र सामने आकर खड़ा हो| जीवन के कड़वे अनुभवों को अपने मन की वेदना में समझते हुए एक कविता का रूप दे देना गजानन मुक्तिबोध के प्रवाह और गतिमान स्वभाव को दिखाता था इसे समीक्षकों द्वारा सराहा गया| 

गजानन माधव मुक्तिबोध की मातृभाषा

वैसे Gajanan Madhav Muktibodh की मातृभाषा मराठी थी इसके बावजूद भी उन्होंने हिंदी को प्रथम भाषा के रूप में चुना|  उन्हें हिंदी भाषा से बहुत प्रेम था और यही वजह थी कि उन्होंने हिंदी को सर्वोपरि रूप में देखा| इसके साथ ही साथ उन्होंने हिंदी के अलावा अंग्रेजी, उर्दू, मराठी एवं तत्सम तद्भव शब्दों का भी इस्तेमाल बखूबी किया| 

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अंत समय में भी लड़ पड़े अपनी मौत से

 श्री Gajanan Madhav Muktibodh जी का निधन 11 सितंबर 1964 को भोपाल के हमीदिया अस्पताल में हुआ|  मौत से पहले भी वह  मौत से ही लड़ रहे थे उनके चाहने वाले लगातार उनकी मौत की जंग देखने के लिए अस्पताल आ रहे थे  जिसमें वह काफी छटपटा रहे थे|  ऐसा लग रहा है मानो वह जाने से इंकार कर रहे हो| 

प्रगतिशील कविता के थे परिचायक

Gajanan Madhav Muktibodh की कविताएं हमेशा से ही प्रगतिशील कविता की परिचायक  है। अगर उनकी कविताओं को गौर से अध्ययन किया जाए तो  देखा जाएगा दूसरे कवियों की आधारभूत समानता के बाद भी मुक्तिबोध की कविताओं में समानता पाई गई|  उन्होंने जो काव्य की रचना की है उसे समझने के लिए पाठ्यक्रम में मुक्तिबोध पर केंद्रित इस इकाई में हम उनकी जीवन प्रक्रिया और रचना प्रक्रिया के संदर्भ में जीवन दर्शन और  काव्य दृष्टि पर विचार किया जा सकता है| 

गजानन माधव मुक्तिबोध की कविताओं की कुछ मुख्य बातें

इन्हें हमेशा दिल  से लिखने वाले कवि माना गया है| साथ ही साथ मुक्तिबोध को मार्क्सवादी  कवि  कहा जाता है|  उनकी सबसे खास बात यही है कि वह मनुष्य के अंदर चल रहे अंतर्द्वंद और मानसिक द्वंद को समझते हुए अपनी कविता को आगे बढ़ाते थे|  अगर आप उनकी कविताओं को समझना चाहते हैं, तो एक बात हमेशा ध्यान रखना होगा कि आप को अंतर्मन और शब्दों के बीच अच्छा ज्ञान होना जरूरी है|  उनकी कविताएं समाज के मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग को हमेशा निम्न वर्ग की सहायता करने के लिए प्रेरित करती थी  जिनसे प्रेरणा  लेकर  कई कवियों ने भी अपनी राह बदल कर लोगों की हर संभव मदद की है| 

गजानन माधव मुक्तिबोध की काव्यगत खासियत

ऐसे कई सारी खासियत है जो गजानन माधव मुक्तिबोध के  काव्य में देखने को मिलती है आज हम आपके सामने इसका उल्लेख करेंगे|

  1. बेहतरीन लेखन क्षमता– मुक्तिबोध को हमेशा एक जटिल कवि के रूप में देखा जाता है|  उनकी कविताओं में हमेशा खुद को खोजने के अलावा पूरे परिवेश को बदलने की प्रक्रिया भी होती थी जो उनकी मुख्य खासियत के रूप में  देखी जाती है|
  2. विशिष्ट काव्य शिल्प– मुक्तिबोध ने अपनी कविताओं में अपनी संवेदनाओं के माध्यम से एक विशिष्टता विश्व का वर्णन किया है। उन्होंने फेंटेसी कहे जाने वाले शब्दों का सार्थक उपयोग यहां पर किया है जो आप उनकी कविता के माध्यम से समझ सकते हैं|
  3. विचारों का महत्वपूर्ण  आवेग– आप उनकी कविताओं में उनके महत्वपूर्ण भाव को देख सकते हैं जो उनके विचारों को दर्शाते हैं|
  4. सरल भाषा शैली– उनकी कविताओं में ऐसी भाषा शैली का चयन किया जाता है, जो आम लोगों को भी आसानी से समझ में आ सके|  उनकी कविताओं में विचार तत्व की प्रधानता होती है जो आसानी से ही पाठकों को समझ में आ जाती है|
  5. छंद रहित कविता– उन्होंने अपनी कविताओं में ज्यादा छंदों का इस्तेमाल नहीं किया है|  ऐसा देखा गया है कि उनकी रचनाओं में मिलने वाले भाव सरल और सहज होते हैं ज्यादातर वे कविताओं को छंद मुक्त रखना ही पसंद करते  थे| इसके साथ ही साथ उनकी कविताएं अलंकार युक्त होती थी जिसमें उन्होंने नए-नए उपमान का उपयोग किया था|

अंतिम शब्द

इस प्रकार से हमने जाना कि श्री Gajanan Madhav Muktibodh बेहद ही उम्दा किस्म के लेखक या कवि थे|  जिन्होंने अपने मन की बात बहुत ही साधारण तरीके से लोगों को बताना उचित समझा|  कुछ विरोधियों ने उनका विरोध भी किया लेकिन इस कदम से उन्हें कोई फर्क नहीं हुआ|  अपने मुश्किल समय को भी उन्होंने बेहतरी के लिए इस्तेमाल करते हुए अपनी कविताओं को लोगों के सामने पेश किया और लोगों ने भी उनकी कविताएं और रचनाओं को हाथों हाथ लिया|  इस तरह से श्री गजानन माधव मुक्तिबोध खुद के अंदर कुछ बदलाव लाते हुए लोगों के दिल में  जगह बनाने में सफलता प्राप्त कर सके|

 उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा बहुत बहुत धन्यवाद| 

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