Adhigam kya hai | अधिगम क्या है, संपूर्ण जानकारी

प्रारंभ काल से ही मनुष्यों ने कई ऐसी बातों को सीखा है जो उनके लिए जरूरी था   लेकिन इसके बावजूद भी मनुष्य द्वारा ऐसी  चीजों को सीखना जरूरी माना गया है, जो कहीं ना कहीं जरूरी भी होता है|  आधुनिक काल में मनुष्यों के पास ऐसे कई  सारी जानकारी होती है जिनके माध्यम से वह किसी भी कार्य को आसानी से कर सकते हैं|  फिर भी कुछ ऐसे लोग भी होते हैं, जिन्हें सही तरीके से जानकारी किसी भी चीज की नहीं हो पाती है|  आज हम आपके सामने एक ऐसा विषय लेकर आ रहे हैं जिसके बारे में  ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं होती हैं|  आज  का हमारा विषय है Adhigam|

 आज हम आपको अधिगम से संबंधित सारी जानकारी देने जा रहे हैं,  जिससे आपको इसे समझने में बिल्कुल भी दिक्कत ना हो पाए|

अधिगम का तात्पर्य

अधिगम ( Adhigam ) को एक प्रक्रिया के रूप में माना जा सकता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति के व्यवहार, अनुभव, अभ्यास, प्रशिक्षण को देखा जाता है|  कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में  असफल रहा हो  उसने भी  हमेशा ही जीवन से कुछ न कुछ सीखा है|  ऐसा माना गया है कि  सीखने की प्रवृत्ति से ही इंसान का विकास हो सकता है|  जो ज्यादा सीखने की प्रवृत्ति को रखता है वह उतना ही कामयाब हो पाता है|

अधिगम क्या है

Adhigam kya hai

कई लोगों को अधिगम के बारे में उचित जानकारी नहीं होती है आज हम आपकी सारी जिज्ञासा को दूर करने वाले हैं|  अधिगम ( Adhigam ) का तात्पर्य होता है सीखना|  जिस दिन से इंसान का जन्म होता है उस दिन से ही वह  नई चीजों को सीखना शुरू कर देता है और जब तक उसके जीवन का अंत होता है, तब तक वह कुछ न कुछ सीखता ही चला जाता है|  जैसे जैसे  इंसानों में  बुद्धि की क्षमता का विकास होता है तो अपने आप ही कई सारी चीजें ऐसी होती हैं जो हमारे मन मस्तिष्क में समा जाती हैं और हमें उसको सीखने की प्रेरणा उत्पन्न होने लगती है|  ऐसा माना जाता है कि जिस इंसान के अंदर जितनी ज्यादा अधिगम की क्षमता होती है उतना ज्यादा ही वह इंसान अपने जीवन में आगे बढ़ पाता है|

अधिगम का उदाहरण

1]  हम देखते हैं कि जब एक छोटा बच्चा चलना शुरू करता है, तो वह थोड़े कदम चल कर गिरने लगता है ऐसे मैं चलने की आदत होने लगती है तो उसे चलना भी अच्छा लगता है|  छोटे बच्चे का बार-बार उठकर चलते रहना अधिगम ( Adhigam ) का ही एक उदाहरण है|

2]   आपने चीटियों को भी देखा होगा| ऐसा माना जाता है कि चीटियों की आंखें नहीं होती लेकिन वह खुशबू को   सूघ कर  एक-दूसरे के पीछे चलती है|  कई बार तो ऐसा होता है कि चीटियां ऊपर की दीवार से गिरकर सीधा नीचे आती है लेकिन  हिम्मत नहीं  हारती और  सतत हिम्मत करते हुए फिर से दीवारों पर चढ़ना शुरु कर देती हैं|  चीटियों का इस प्रकार से ऊपर नीचे करना अधिगम का एक उदाहरण माना जा सकता है|

3]  जब हम किसी चीज को नए नए तरीके से करना शुरू करते हैं,  तो शुरुआत में हमसे कुछ गड़बड़ी होने लगती है लेकिन  जब उस काम को करते जाते हैं, तो हमारे अंदर  उस प्रक्रिया को सीखने की क्षमता का विकास होता है जो प्रतिदिन  बेहतरीन तरीके से  होता चला जाता है|  इस प्रकार से हम इसे भी अधिगम का  बेहतर उदाहरण मान सकते हैं|      

वैज्ञानिकों की अधिगम के बारे में अपनी राय

विभिन्न वैज्ञानिकों के द्वारा अधिगम को अलग अलग तरीके से समझाया गया है लेकिन सभी के समझाने का तात्पर्य एक ही मालूम पड़ता है|

  1. बी एफ स्किनर के अनुसार— सीखना  व्यवहार में  उत्तरोत्तर सामंजस्य की  प्रक्रिया है|
  2.   बूट वर्क  के अनुसार— सीखना  विकास की प्रक्रिया है|
  3.   जेपी  गिल्ट फंड  के अनुसार–  व्यवहार के कारण व्यवहार में परिवर्तन ही सीखना है|
  4.  काल्विन के अनुसार —  पहले से निर्मित व्यवहार में अनुभव द्वारा हुए परिवर्तन को  अधिगम कहते हैं|
  5.  को एंड क्रो के अनुसार–   सीखना आदतों  ज्ञान और  अभिवृत्ति  का अर्जन है| 

अधिगम के प्रकार

विभिन्न वैज्ञानिकों के व्याख्यान  के द्वारा अधिगम को मुख्य 8 भागों में बांटा गया है,  जिसके अंतर्गत ही अपने कार्यों को समझा जा सकता है|

  1. संकेतक अधिगम
  2.  श्रृंखला अधिगम
  3.  उद्दीपन अनुक्रिया अधिगम
  4.  शाब्दिक साहचर्य अधिगम
  5.  संप्रत्यय अधिगम
  6.  सिद्धांत अधिगम
  7.  समस्या समाधान अधिगम
  8. विभेद आत्मक  अधिगम

अधिगम के कुछ प्रमुख सिद्धांत

जब भी हमारे सामने अधिगम की बात होती है, तो कोई ना कोई सिद्धांत सामने आ ही जाता है|  इस सिद्धांत के अनुसार चलकर ही हम  अन्य बातों को समझ सकते हैं और फिर उन्हें देखकर व्यवहार में  ला भी  सकते हैं|

  1. अधिगम ( Adhigam ) व्यवहार में परिवर्तन है जिससे समय-समय पर महसूस किया जा सकता है|
  2.  अधिगम ( Adhigam ) हमेशा  उद्देश्य परक होता है जिसमें जीवन के प्रति एक  उद्देश्य छिपा होता है|
  3.  अधिगम ( Adhigam ) व्यक्तिगत व सामाजिक दोनों प्रकार के होते हैं,  जो वातावरण के अनुसार   ढल सकते हैं| 
  4. अधिगम व्यक्तिगत और सामाजिक दोनों तरह से होते हैं, जो वातावरण के अनुसार खुद के अंदर परिवर्तन कर लेते हैं|
  5.  ऐसा देखा गया है कि अधिगम व्यक्ति के अंदर होने वाले  आचरण को प्रभावित करते हैं फिर चाहे अच्छा हो या बुरा|
  6.  अधिगम एक प्रकार का अनुभव का संगठन होता है|

अधिगम के विभिन्न सिद्धांत

अधिगम ( Adhigam ) को अगर गहराई के साथ सोचा जाए तो इसके अंतर्गत कुछ सिद्धांत होते हैं जिनकी बदौलत आगे बढ़ा जा सकता है और परिवर्तन भी किया जा सकता है|

1]  अधिगम के ज्ञानात्मक क्षेत्र सिद्धांत– ऐसा माना गया है कि इस सिद्धांत के अनुसार किसी भी सीखने की प्रक्रिया में कई प्रकार की समानताएं देखी जा सकती हैं|  सीखने की प्रक्रिया उद्दीपक होती है जो कई प्रकार की व्यक्तिगत क्षमता,  इच्छा और  अभिरुचि  पर निर्धारित होती है|  इस सिद्धांत के अंतर्गत कई सारे वैज्ञानिकों ने अपनी दलीलें दी हैं  जिसमें उन्होंने होने वाले परिवर्तन के बारे में बताया है|

2]  अधिगम के संबंध वादी सिद्धांत— इसके अंतर्गत हमेशा इस प्रकार के सिद्धांत आते हैं जिनमें उद्दीपक  और   अनुप्रिया   के मध्य एक संबंध स्थापित किया जाता है जिसके कारण  उद्दीपक ज्यादा  उपस्थित होते हैं और जिसे  अपने  व्यवहार  में भी महसूस किया जा सकता है|

अधिगम के विभिन्न घटक

अधिगम ( Adhigam ) में प्रभावशाली अधिगम को सर्वोच्च माना गया है, जो कभी-कभी व्यक्तियों को असामाजिक सफलता तक हो जाती है। इसके लिए निम्न घटक महत्वपूर्ण होते हैं

  •  प्रत्यक्षत्मक
  •  प्रत्ययत्मक
  •  संवेगात्मक
  •    गामक
  •  कौशल अधिग्रहण
  •  प्रक्रियात्मक
  •  अन्य   परिस्थिति के घटक

अधिगम के मुख्य अवरोधक

अगर आप अधिगम की बात करें तो यह बहुत ही प्रेरणादायक होता है, जिसे सीखना  बहुत ही अच्छा माना जाता है|  कई बार इस अधिनियम के राह में  अवरोध उत्पन्न हो जाते हैं जिनकी वजह से कार्य सुचारू रूप से नहीं  चल पाता|

  1.  सीखने की परिस्थिति सही नहीं होना|
  2.  उद्देश्य का सही तरीके से सामने नहीं आना|
  3.  जीवन के सही  भागो को आपस में नहीं जोड़ पाना|
  4.   भाषा को अधिगम से जोड़ना
  5.  अपने परिणाम में  परि चयन  करना|
  6.  शिक्षक का सही तरीके से बातों  को ना  समझाना|

अधिगम की सही विधियां

अगर आप अधिगम ( Adhigam ) सही तरीके से सीखना चाहते हैं, तो उनकी विधियों के बारे में जानकारी देना जरूरी माना गया है|  जिसके बाद ही आप अधिगम को सीखने के लिए कामयाबी हासिल कर सकते हैं|

  1. किसी भी कार्य को करके सीखना|
  2.  किसी भी कार्य को करते समय पूर्ण रूप से निरीक्षण करना|
  3.  वाद विवाद की विधि से कार्य करना|
  4.   सही   विधि अपनाना
  5.  अंतराल और अंश विधि  में परिवर्तन करते हुए आगे बढ़ना|
  6.  प्रयास विधि  मैं और भी जोर लगाना|
  7.  निरीक्षण करके किसी भी कार्य को सीखना|
  8.  अनुकरण विधि अपनाना

अंतिम शब्द

इस प्रकार से हमने जाना कि अधिगम ( Adhigam ) सतत रूप से सीखने की प्रक्रिया है जिसे विभिन्न क्रियाओं के द्वारा पूर्ण किया जा सकता है|  जब भी हमारे जीवन में कोई उतार-चढ़ाव आता है, तो अधिगम के द्वारा ही हम सही तरीके से किसी भी कार्य को अंजाम दे पाते हैं और परिणाम प्राप्त करते हैं|  अगर आप अधिगम को सही तरीके से समझ जाते हैं,  तो  जीवन में आने वाली कठिनाइयों को भी आसानी से दूर कर सकते हैं|  उम्मीद करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आएगा|  Also Read.Abdul Rahim Khan-i-Khanan

कक्षा अधिगम क्या है?

अधिगम को एक प्रक्रिया के रूप में माना जा सकता है जिसके अंतर्गत व्यक्ति के व्यवहार, अनुभव, अभ्यास, प्रशिक्षण को देखा जाता है|

अधिगम वातावरण क्या है?

हम देखते हैं कि जब एक छोटा बच्चा चलना शुरू करता है, तो वह थोड़े कदम चल कर गिरने लगता है ऐसे मैं चलने की आदत होने लगती है तो उसे चलना भी अच्छा लगता है|  छोटे बच्चे का बार-बार उठकर चलते रहना अधिगम का ही एक उदाहरण है|

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